अशुभ होता है खरमास का महीना, जानिए क्यों नहीं करते इसमें मांगलिक कार्य

खरमास प्रारंभ हो रहा है 13 मार्च 2021 में। खऱमास का माह किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए अशुभ माना जाता है। जो इस महीने में मांगलिक कार्य करता है उनके कार्य पूर्ण होने में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। यही नहीं कार्य में अशुभ होने की संभावनाएं भी होती हैं। खरमास के महीने को क्यों अशुभ माना जाता है आइए विस्तार से चर्चा करते हैं।

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खरमास का माह क्यों होता है अशुभ


खरमास के पीछे एक ऐसी कथा है जिसमें सूर्य भगवान अपने सातों घोड़ों के साथ घूमने के लिए निकलते हैं। घूमते घूमते उनके दो घोड़े थक जाते हैं। घोड़े को पानी पिलाने के लिए भगवान सूर्य को एक तालाब दिखाई देता है वहीं वे अपने घोड़े को ले जाते हैं। लेकिन पानी पीते-पीते उनके वह घोड़े थकान के कारण अकड़ने लगता है। उसी दौरान सूर्य देव को यह स्मरण होता है कि सृष्टि के नियम के अनुसार उन्हे निरंतर चलते रहने का निर्देश है और उसी समय सूर्य देव को तालाब के पास दो गधे नजर आते हैं और वे अपने घोड़ों को तालाब के पास ही जोतकर उन दो गधों को साथ ले जाते हैं। इस वजह से वे मंद गति से सवारी करते रहे जिससे उनका तेज कम हो गया। एक महीने के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं जिससे उनका तेज बढ़ जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भीष्म पितामह भी खरमास के महीने में ही मृत्यु को प्राप्त हुए थे। ऐसी मान्यता है जिनकी मृत्यु खरमास में होती है उन्हे नर्क की प्राप्ति होती है।

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खरमास में क्या नहीं करें


खरमास या मलमास ऐसा महीना होता है जिसमें कोई भी शुभ मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। खरमास सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही समाप्त हो जाता हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। खरमास के महीने में विवाह, ग्रह प्रवेश, मुंडन, नामकरण संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, वधू प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का शुभारंभ आदि नहीं करना चाहिए। इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य भगवान को जल देने की परंपरा होती है।

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