चित्रगुप्त पूजा मार्च 2021: चित्रगुप्त पूजा के दिन मिलेगा यह वरदान, जानिए इसकी पूजन विधि

चित्रगुप्त पूजा का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है। कई व्यापारी चित्रगुप्त पूजा के दिन ही नए बहीखातों में लेखा जोखा शुरू करते हैं। भारत में हर जगह चित्रगुप्त पूजा अलग-अलग मनाई जाती है। चित्रगुप्त अपने दरबार में पृथ्वी पर इंसानों द्वारा किए गए सभी पाप पुण्य का लेखा जोखा करते थे। ऐसी मान्यता है कि चित्रगुप्त ब्रह्मा से पहले कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन चित्रगुप्त की पूजा की जाती है।

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चित्रगुप्त पूजा का दिन

भारत में सभी राज्यों में चित्रगुप्त पूजा अलग अलग दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत में यह पूजा कुछ समुदायों द्वारा चैत्र माह के कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन की जाती है। अधिकांश लोग दिवाली के बाद भाईदूज के दिन चित्रगुप्त पूजा करते हैं> इसी दिन से व्यापारी अपने व्यापार का लेखा जोखा नए बहीखाते में "श्री" लिखकर करते हैं। मध्य प्रदेश में चित्रगुप्त पूजा चैत्र माह के दौरान यानि होली के दो दिन बाद की जाती है। वहीं तमिलनाडु में चित्रगुप्त पूजा तमिल में चिट्टिराई में पूर्णिमा के दिन की जाती है।

चित्रगुप्त कौन थे

ऐसा माना जाता है कि चित्रगुप्त का जन्म भगवान ब्रह्मा के शरीर से हुआ था। यह भगवान ब्रह्मा के शरीर से पैदा हुए थे इसलिए उन्हें कायस्थ के रूप में जाना जाता था और पृथ्वी पर इन्हें चित्रगुप्त के रूप में जाना जाता था। यह लोगों द्वारा किए गए अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा जोखा रखते थे और यह सभी सूचना यमराज को देते थे। चित्रगुप्त कायस्थ थे इसलिए कायस्थ जाति के लोग अपने आप को चित्रगुप्त के ही वंशज मानते हैं इसलिए वे विशेष तौर से चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। इस दिन कई स्थानों पर शोभा यात्रा, साहित्यिक गतिविधियां और दान आदि कार्य किए जाते हैं। चित्रगुप्त पूजा विधि

चित्रगुप्त की पूजा करने के लिए जिस स्थान पर पूजा करनी है उसे अच्छी तरह से साफ करके वहां एक साफ कपड़ा बिछा लें। इसके बाद धूपबत्ती और दिया जलाकर यहां चित्रगुप्तजी की मूर्ति रख लें। इसके साथ ही गणेश जी की भी मूर्ति रखें। सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। गणेश जी को चन्दन, हल्दी, अक्षत, फूल आदि चढ़ाएं। इसके बाद चित्रगुप्त जी की मूर्ति पर चन्दन, हल्दी, अक्षत, फूल से पूजन करें। इसके बाद फल, मिठाई, गुड़, पान-सुपारी और पंचामृत का भोग लगाएं। इसके बाद अपने किसी किताब और कलम की पूजा कर इनके सामने रख दें। एक कोरे कागज पर स्वस्तिक बनाकर इस पर अपने सभी आय-व्यय का विवरण लिखकर चित्रगुप्त जी के सामने रख दें।

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