हूती विद्रोहियों के कारण बढ़े तेल के दाम, जानिए तेल का पूरा ‘खेल’


हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल भंडार पर हमला कर दिया था। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगभग 3% तक बढ़ गए हैं। अब यह बढ़कर 71.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। जाहिर है इसका असर भारत पर भी पड़ेगा क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था की निर्भरता काफी हद तक तेल के आयात पर निर्भर है। फरवरी के बाद शुरू हुए शुरुआती हफ्तों में तेल की कीमत लगातार बढ़ रही है। सऊदी अरब भारत को तेल निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश भी है भारत तेल आयात करने वाला अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा देश है और उसने पिछले साल अपनी जरूरत के पेट्रोलियम उत्पाद का 85% हिस्सा आयात किया था, जिस पर भारत ने 120 अरब डॉलर खर्च किए थे, इसलिए सऊदी अरब पर हमलों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर होता है।


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रिजर्व बैंक की रिपोर्ट

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एक रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर साल $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल कई गुना बढ़ जाता है। दूसरी तरफ पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ जाते हैं। इन दिनों भारत के कुछ शहरों में पहली बार पेट्रोल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए है।


युद्ध के कारण बीते सालों में बढ़े तेल के दाम

गौरतलब है कि विदेशों में बीते 6 सालों से जुड़े युद्ध से तेल के बाजार में अनिश्चितता आई है। ऐसे में भारत चाहता है कि सऊदी अरब और यमन के बीच शांति स्थापित हो क्योंकि दोनों के बीच जारी युद्ध से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं और यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।


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सऊदी अरब की तेल उत्पादन क्षमता

सऊदी अरब एक दिन में लगभग 6500000 बैरल तेल निर्यात करने में सक्षम है, जो दुनिया की मांग का 7% तेल है। यमन में गृह युद्ध के बाद की हूती मिलिशिया ने देश के उत्तरी भाग और राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। सऊदी अरब ने कहा कि इस मिलिशिया को ईरान का समर्थन हासिल है, इसमें संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ खाड़ी देशों के साथ सैन्य गठबंधन करके 2015 में यमन में हूती मिलिशिया पर चढ़ाई कर दी। इस युद्ध में अब तक 12000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि युद्ध के कारण यमन में दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है।


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तेल उत्पादक देशों ने ठुकराई भारत की ये मांग

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में विद्रोहियों को चरमपंथी घोषित कर दिया था। दूसरी तरफ तेल पैदा करने वाले देशों के संगठन ओपेक तेल का उत्पादन कम कर दिया है। इधर भारत सरकार ने सऊदी अरब और तेल पैदा करने वाले दूसरे देशों से अपील की थी कि वह तेल का उत्पादन बढ़ाए ताकि तेल के दाम कम हो सके लेकिन इन देशों ने भारत की मांग को ठुकरा दिया। बाजार विशेषज्ञ और ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष आरएस शर्मा कहते हैं तेल के बाजार में अनिश्चितता लगातार बनी रहती है। देश में पेट्रोल और डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव से जुड़े होते हैं।


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