महाशिवरात्रि पर्व: नहीं सुनी होगी शिकारी चित्रभानु की ये कथा, शिव पुराण में ऐसा है जिक्र

अपडेट किया गया: फ़र. 1

देवों के देव महादेव जो जन्म-जन्मान्तर से पूजे जा रहे हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद ही आसान हैं क्योंकि शिवजी बहुत भोले हैं। इनके भोले स्वभाव के लिए ही इन्हे भोलेनाथ भी कहा जाता है। वैसे तो इनके कई नाम है और जितने इनके नाम उतने इनकी माया है। भगवान शिव और शक्ति के मिलन पर ही शिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। शिव भगवान की आराधना का त्यौहार महाशिवरात्रि दक्षिण भारतीय पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मनाया जाता है। लेकिन उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार शिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। शिवरात्रि दोनों की पंचांगों के अनुसार एक ही दिन मनाई जाती है। महाशिवरात्रि के खास पर्व को इस नववर्ष में किस दिन मनाई जा रही है आइए जानते हैं-


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महाशिवरात्रि साल 2021 में इस दिन मनाई जाएगी

इस साल 2021 में यह महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को गुरूवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन कुंभ राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और शुक्र का संचरण होगा। महाशिवरात्रि का त्यौहार इसलिए विशेष है क्योंकि इस दिन शिव के भक्त शिव की पूजा आराधना कर इनके लिए पूरा दिन उपवास रखते हैं। इस दिन लोग शिव को दूध से नहलाकर इनके पसंदीदा बेलपत्र, धतूरे के फूल और आक के फूल चढ़ाकर उन्हें प्रसन्न करते हैं। इस दिन शिवजी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं। इस दिन कई जगहों पर महाशिवरात्रि के मेले भी आयोजित किए जाते हैं। कई जगहों पर शिव भक्त शिव को प्रसन्न करने के लिए कई अनुष्ठान भी करते हैं जिसमें शिव पुराण, महामृत्युंजय, शिव मंत्र और शिव की आरती की जाती है। कई लोग इस दिन रात्रि जागरण भी करते हैं। इस दिन भगवान शिव की पसंदीदा ठंडाई भी पी जाती है।


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महाशिवरात्रि में पूजा के लिए मुहूर्त

महाशिवरात्रि: 11 मार्च 2021 पूजा समय: 00:06 से 00:55, मार्च 12 अवधि: 00 घण्टे 48 मिनट शिवरात्रि पारण समय - 06:34 से 15:02, 12 मार्च 2021: रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय: 18:27 से 21:29 रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय: 21:29 से 00:31, 12मार्च रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: 00:31 से 03:32, 12 मार्च रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: 03:32 से 06:34, 12 मार्च चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ: 14:39 बजे, 11 मार्च चतुर्दशी तिथि समाप्त: 15:02 बजे 12 मार्च


शिवलिंग की पूजा का क्यों है महत्व

शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग जो भगवान शिव का प्रतीक है। दरअसल शिव का अर्थ होता है सबका कल्याण करने वाले और लिंग का तात्पर्य होता है सृजन करने वाले। लिंग का अर्थ संस्कृत में प्रतीक होता है। शिव का लिंग सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड का प्रतीक माना जाता है। पूरी सृष्टि का सृजन करने वाले शिव ही हैं। अनंतकाल से कई पुराणों में शिव का वर्णन मिलता है इसलिए इन्हे देवों के देव महादेव कहा जाता है। शिव पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि इसी दिन ब्रम्हाजी और विष्णुजी में अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया था और इसी विवाद में एक अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ और इसी से एक आकाशवाणी हुई कि जो इस अग्नि के आदि और अंत के बारे में जान लेगा वही सर्वश्रेष्ठ कहलाएगा। उसी दिन ब्रम्हाजी और विष्णुजी ने इस रहस्य के बारे में जानने की कोशिश की लेकिन कई युगों तक इसका पता नहीं लगा पाए। इसके बाद विष्णुजी ने अपनी हार स्वीकार की इसके बाद इस अग्निस्तंभ से रहस्य जानने की इच्छा जताई। इसके बाद यह अग्नि स्तंभ एक दिव्य ज्योंतिर्लिंग में परिवर्तित हो गया। इससे भगवान शिव ने प्रकट होकर ब्रम्हाजी और विष्णुजी दोनों को ही सर्वश्रेष्ठ बताया। जिस दिन यह घटना घटित हुई उसी दिन महाशिवरात्रि का दिन था।

महाशिवरात्रि की कथा

महाशिवरात्रि का वर्णन गरुड़, स्कंद, अग्नि, शिव और पद्म जैसे कई पुराणों में मिलता है। इन सभी में महाशिवरात्रि की कथा एक समान तो नहीं है लेकिन इन कथाओं की रुपरेखा लगभग एक ही तरह की हैं। एक कथा जो शिव पुराण में मिलती है इसके अनुसार एक समय चित्रभानु नामक शिकारी शिकार कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उस पर साहूकार का काफी कर्ज था, कई समय से कर्ज चुकता न करने के कारण साहुकार ने उसे बंदी बना लिया और उसी दिन शिवरात्रि थी। दिनभर वह भूखे प्यासे रहते हुए उसने भगवान शिव का स्मरण किया। उसी दिन शाम को उस साहूकार ने उस शिकारी को कर्ज चुकाने के लिए अलगे ​एक दिन का समय दिया और चित्रभानु को छोड़ दिया। इस तरह की और भी कई कथाएं हैं जिनका वर्णन मिलता है।


इस तरह के पूजन से मिलेगा फल

शिवरात्रि की रात्रि को 1 लाख बार महामृत्युंजय के जाप से फल मिलता है। शिव पुराण के अनुसार जो भक्त यदि महामृत्युंजय का जाप यदि 5 लाख बार कर लेता है तो उसे शिव के दर्शन की प्राप्ति होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन कच्चा धाना शिवलिंग और देवी पार्वती की प्रतिमा पर सात बार लपेटना चाहिए। इस रात्रि में शिव पुराण का पाठ करने से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

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