सेप्टिक गठिया क्या होता है, कैसे किया जाता है इसका उपचार

जीवनशैली में कई तरह के बदलाव के चलते लोग गठिया रोग के शिकार हो रहे हैं। इन्हीं में से एक सेप्टिक गठिया रोग होता है, जो संक्रमण की तरह ही फैलता है। यह ज्यादातर उन लोगों में होता है, जिन्हें कोई चोट लगी हो या सर्जरी हुई हो या कोई इंजेक्शन लगाया गया हो। इन सभी के जरिए संक्रमण जोड़ों में फैलता है, इसलिए इसे संक्रामक गठिया भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कि सेप्टिक गठिया के क्या लक्षण होते हैं और इसके उपचार कैसे किया जा सकता है -




सेप्टिक गठिया रोग के लक्षण

सभी आयु वर्ग में सेप्टिक गठिया के लक्षण अलग-अलग भी हो सकते हैं और कुछ लक्षण एक जैसे भी हो सकते हैं लेकिन इस रोग के सभी सामान्य लक्षण जोड़ों में सूजन होना, दर्द होना, जोड़ों पर लालिमा दिखना, बुखार आना, ठंड महसूस होना आदि हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त सेप्टिक गठिया के अन्य लक्षणों में अधिक कमजोरी महसूस करना, गैस एसिडिटी की समस्या होना और त्वचा पर झुर्रियां होना आदि हो सकते हैं। सेप्टिक गठिया में कंधे, घुटना, कलाई, कोहनी, कमर आदि अंग अधिक प्रभावित होते हैं। इस इंफेक्शन के संपर्क में आने पर व्यक्ति कुछ ही समय बाद इन लक्षणों को महसूस करने लगता है। कुछ मामलों में लक्षण महसूस होने पर समय भी लग सकता है।


सेप्टिक गठिया रोग के कारण

सेप्टिक गठिया रोग संक्रमण की वजह से फैलता है। तीव्र गठिया रोग के मामले में स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टिरिया फैलने के कारण इससे रोगी को जोड़ों में बहुत अधिक दर्द होने लगता है। वहीं गंभीर रूप से सेप्टिक गठिया के रोगियों में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस और कैंडिडा अल्बिकंस जैसे कई बैक्टिरिया के जाने से होता है। यह एक तरह का असामान्य सेप्टिक गठिया रोग होता है।


सेप्टिक गठिया का इलाज

सेप्टिक गठिया इंफेक्शन के कारण होता है। जब इंफेक्शन दूर हो जाता है तो यह ठीक हो जाता है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, अन्यथा जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। सेप्टिक गठिया को ठीक होने में एक सप्ताह का समय लग सकता है। इस इंफेक्शन को दूर करने के लिए डॉक्टर रोगी को कुछ एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। यह एंटीबायोटिक रोगी को लक्षण नजर आने पर तुरंत लेना शुरू कर देना चाहिए। इसके अतिरिक्त जोड़ों के ड्रेनेज की प्रक्रिया को भी अपनाया जा सकता है। इसमें जोड़ों के इंफेक्शन को निकालने की लिए इंजेक्शन का सहारा लिया जाता है। इससे जोडों से संक्रमित तरल पदार्थ को निकाला जाता है। इसी में अन्य प्रक्रिया होती है स्कोप प्रक्रिया। इसके लिए अर्थस्कोपी की जाती है, जिसके माध्यम से जोड़ों में लचीली ट्यूब डालकर इसी के साथ कैमरा भी अटैच किया जाता है। इसी तरह एक प्रक्रिया ओपन सर्जरी की भी होती है। कुछ जोड़ ऐसे होते हैं जैसे कूल्हे के फ्लूइड, जिसे अर्थस्कोपी के माध्यम से पता लगाना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में चिकित्सक को ओपन सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है। यदि इंफेक्शन किसी वायरस के कारण हुआ है, तो इसमें अधिकांश उपचार काम नही आते हैं। ऐसे में रोगी को एंटी फंगल दवाएं दी जाती हैं।

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